Tuesday 17 October 2017

दिवाली पर खास


इस दिवाली कुछ खास करते हैं
फिर से एक दूसरे पर विश्वास करते हैं

लोग बताते हैं तुम्हे मुझसे शिकायत बहुत है
चलो इस बार आपस मे बात करते है


ये तो सच है कि दूरियां समेटी नही जा सकती
फिर भी दिल से पास होने का अहसास करते हैं

पुरानी यादें साथ है या भूल गए हो
फोन मिलाओ,सारी रात बकवास करते हैं

ये ख्याल जाकर के कहीं दफन क्यों नही होते
हंसते-खेलते रिश्ते का सत्यानास करते हैं

हर बार "गुरू"ने जख्मो की बात की है
आज खुशियों का हिसाब करते हैं

इस दिवाली कुछ खास करते हैं
एक दूसरे पर विश्वास करते हैं।