Saturday, 7 March 2026

बाख़ुदा तुम्हारे सिवा इश्क़ , किसी से नहीं किया

 बाख़ुदा तुम्हारे सिवा इश्क़ , किसी से नहीं किया 

इतिहास रहेगा, जब तक जिया, तुम्हारा बनके जिया 


तुम्हारे साथ बैठकर जो की, बस वही बातें थीं

याद  में जगकर जो काटीं, बस वही रातें थीं।

किसी के साथ 'चाय' का ज़ायका नहीं चखा हमने

जबरन कप उठा भी लिया, तो मानो अहसान किया 

बाख़ुदा तुम्हारे सिवा इश्क़, किसी से नहीं किया।


हमने खेली थी जो संग तुम्हारे, बस वही होली और फाग था

उसके बाद से तो इस कलेजे में, जलता विरह का आग था।

तुम्हारे सिवा किसी और को रंगा नहीं, ना तब और ना अब

ज़रूरी हुआ तो रंग बस हथेली पर बे-जान सा धर दिया।

बाख़ुदा तुम्हारे सिवा इश्क़, किसी से नहीं किया।


हर शाम सूखी नज़रों से तुम्हारा इंतेज़ार करतें हैं 
अकेले बैठते हैं,आँखें बंद करके संगीत सुनते हैं 
दिन रात दोपहर सबमे बाँट दिए “गुरु” ने 
शाम का पहर तुम्हारा था,आज भी किसी के नाम नहीं किया 
बाख़ुदा तुम्हारे सिवा इश्क़ , किसी से नहीं किया