Friday, 10 October 2025

राम जाणे, के आगे आवै सै

बाबू ये काम जनाने पण के,मनै भी क़द भावै सै 

के पाप करे थे राम जाणे, के आगे आवै सै 


लत्ते धोण की खातर कद मेरा जी मानै सै 

कासण माँजदे होयाँ कै बीते,मेरा जी जाणे सै 

छाती ऊपर मेरे भी सौ साँप लोटणी खावै सै 

के पाप करे थे राम जाणे, के आगे आवै सै 


आटा गूँथणा ,रोट बनाने मने कद चाये थे 

थारी अर मेरी रोटी खातर खूब धक्के खाये थे 

हालत पै अपणी भी मनै रोणा सा आवै सै 

के पाप करे थे राम जाणे, के आगे आवै सै 


मैंने बेरा सै यू सब देखके तेरा भी जी दुखे सै 

माँ की भी भीतर ए भीतर आत्मा सी फूँके सै 

सोच के टैम काटूँ अक बख्त बुरा सबपै ए आवै सै 

के पाप करे थे राम जाणे, के आगे आवै सै 


समझूँ तो मैं भी सब सूँ,सारे सच जाणु सूँ 

रोल्या यो सै अक घर भीतर रोल्या ना चाहूँ सूँ 

ख़ुद जल ल्यूँ,मर ल्यूँ पर किसे तई कहण पै के हो जा सै 

के पाप करे थे राम जाणे, के आगे आवै सै 


मने कही थी बापू,मत ब्याह मनै ,मैं एकला मर-खप ल्यूंगा 

रहूँ जिस्या रह ल्यूँगा ,किसे नै दुख तो नहीं देऊँगा 

इब जीते जी यो लाल तेरा रोज़ चिता ज्यूँ बले जा सै 

के पाप करे थे राम जाणे, के आगे आवै सै 


मेरी सासू न्यूँ कर मनै चोखी तरियाँ बालक नुहाणे सिखादे 

कपड़े,भांडे,रोटी आगी, इब सब्ज़ी बनानी और सिखादे 

काल कोये न्यू ना कहदे अक लुगाई नै तड़पा है 

के पाप करे थे राम जाणे, के आगे आवै सै


रोटी-टूका खातर कद लग सरकार घर झुड़वावेगी 

सारे काम कराए इब के फाँसी तुड़वावेगी 

परिवार व्यपार समाज़ सारे क्यों एक ही पलड़े आवै सै 

के पाप करे थे राम जाणे, के आगे आवै सै

No comments: