Wednesday, 18 March 2026

तुम्हारे पास आ चुप-चाप लबों को चूमना था बस..।।

 

तेरी सोहबत मे बैठकर, जरा सा झूमना था बस

ले हाथ मे चाय, तुम्हारे साथ छत पर घूमना था बस

होती रात और तुम बगल मे मेरे चाँद बन सोते

तुम्हारे पास आ चुप-चाप लबों को चूमना था बस

 

ठंडी सी हवा चलती, होती रोशनी हल्की सी

बंद पलकें तुम्हारी मोटी-मोटी आँखों को ढके रखती

हो माथे-गाल से बालों की लट होंठों तलक उड़ती

उड़ते बालों को उंगलियों से झुमके के पीछे लपेटना था बस

तुम्हारे पास आ चुप-चाप लबों को चूमना था बस

 

करवट ले भी ली मैंने पर तुम्हारे फूले गाल नहीं भूला

कस्तूरी,चंदन भूल गया पर तुमसे उड़ता गुलाल नहीं भूला

सन्नाटे मे भी मुझको मेरी साँसे मानो शोर सुनाई दी

गहरी सांस लेकर मन ही मन तुम्हें सूंघना था बस

तुम्हारे पास आ चुप-चाप लबों को चूमना था बस

 

बिछड़ी भी तो ऐसी कि सपन तक मे दिखाई न दी

न मिले कभी गले,न साथ मे तस्वीर कभी कोई ली

बिछड़ने की खबर होती तो एक-एक ख्वाब मुकम्मल करते

अरसा ऐसा गुजरा की तुम्हारी आवाज तक न सुनाई दी

हो बेपरवाह भारी आँखों से तुमसे जी भरकर लिपटना था बस

तुम्हारे पास आ चुप-चाप लबों को चूमना था बस

 

 "गुरु"

 

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