Tuesday, 30 June 2026

बुरा ही मान गए…

 हम उनके दोगलेपन के बारे में क्या जान गए

वो तो बुरा ही मान गए


पीठ पीछे करते रहे ,मारने की साज़िश

सामने देखा तो हमारी लंबी उम्र पर क़ुर्बान गए


हमारी गलती होती तो नज़रें झुकाकर माँगते माफ़ी

तुमने गलती की ,फिर सीना भी तान गए


साथ हमारे बिताए समय को नज़रअंदाज़ किया

दूसरों ने कान भरे,और तुम सच मान गए


दिल में बसाकर उनके लिए क्या -क्या करता रहा ख़ुदा 

उनकी बारी आई तो उठाकर सामान गए 


नादानियाँ नज़रअंदाज़ करने को काला चश्मा पहना था 

तुम तो ग़ालिब,हमे अंधा ही मान गए 


कुछ देर म्यार में आराम करने को क्या उतरा "गुरु"

वो तलवार की धार को कम जान गए

Saturday, 27 June 2026

आँखों ही आँखों में ..

 चाय की प्याली हाथों में ले, मुंडेर पर रुक जाता हूँ मैं,

आँखों ही आँखों में अक्सर, तेरी छत तक आ जाता हूँ मैं।


बंद आँखों से भी तुझको, उस छत पर हँसते देखता हूँ,

मानो नयन मिले हों तुमसे, यूँ ही मुस्कान बिखेरता हूँ।

यादों के कुछ गीत चलाकर, संग तुम्हारे गुनगुनाता हूँ मैं


आँखों ही आँखों में अक्सर, तेरी छत तक आ जाता हूँ मैं।


जब ढलती है शाम शहर में, और आसमां में चाँद आता है,

तेरी छत का वो सूनापन, मेरी धड़कन को महका जाता है।

हवा के हर एक झोंके में, तेरी आहट सुन मुस्काता हूँ मैं


आँखों ही आँखों में अक्सर, तेरी छत तक आ जाता हूँ मैं।


सालों बीते बिछड़े हमसे, पर अब भी तुमसे खूब बनती है,

इस एकतरफा मोहब्बत की, यारा अपनी ही मर्ज़ी चलती है।

तन्हा होकर भी 'गुरु' हर पल, तेरा साथ निभाता हूँ मैं,


आँखों ही आँखों में अक्सर, तेरी छत तक आ जाता हूँ मैं।