Tuesday, 20 October 2026

तस्वीर तो अच्छी है तुम्हारी …

 तस्वीर तो अच्छी है तुम्हारी 

पर इसमें तुम,,,,,तुम नहीं लगती ,,,,


कपड़े किसी ने शायद तुम जैसे पहने हों 

जूते चप्पल,बाल,गहने सब तुम जैसे हों,,,,

सूरत तुमसे मिलती है,सीरत नहीं मिलती 


तस्वीर तो अच्छी है तुम्हारी 

पर इसमें तुम,,,,,तुम नहीं लगती ,,,,



पहले की तुलना में चेहरे पर निखार जरा कम है 

होंठों पर मुस्कान नहीं,पलकों में ठंडा मौसम है 

मुझे देखके जितना खुलती थी,अब आँखें उतना नहीं खुलती 


तस्वीर तो अच्छी है तुम्हारी 

पर इसमें तुम,,,,,तुम नहीं लगती ,,,,


सबके साथ खड़ी होकर भी तस्वीर में तन्हा सी हो 

दबी-दबी सी दिल में मानो कोई अधूरी तमन्ना सी हो 

कंगन से हाथ भरे हुए हैं पर उनपर मेहंदी नहीं खिलती


तस्वीर तो अच्छी है तुम्हारी 

पर इसमें तुम,,,,,तुम नहीं लगती ,,,,


कई दिल ज़ीते,कई रखे -कई तोड़े आज भी 

तुमसे पहले भी और कुछ तुम्हारे बाद भी 

बस एक तुम हो जिसपर “गुरु” की एक नहीं चलती 


तस्वीर तो अच्छी है तुम्हारी 

पर इसमें तुम,,,,,तुम नहीं लगती ,,,,