हम उनके दोगलेपन के बारे में क्या जान गए
वो तो बुरा ही मान गए
पीठ पीछे करते रहे ,मारने की साज़िश
सामने देखा तो हमारी लंबी उम्र पर क़ुर्बान गए
हमारी गलती होती तो नज़रें झुकाकर माँगते माफ़ी
तुमने गलती की ,फिर सीना भी तान गए
साथ हमारे बिताए समय को नज़रअंदाज़ किया
दूसरों ने कान भरे,और तुम सच मान गए
दिल में बसाकर उनके लिए क्या -क्या करता रहा ख़ुदा
उनकी बारी आई तो उठाकर सामान गए
नादानियाँ नज़रअंदाज़ करने को काला चश्मा पहना था
तुम तो ग़ालिब,हमे अंधा ही मान गए
कुछ देर म्यार में आराम करने को क्या उतरा "गुरु"
वो तलवार की धार को कम जान गए