Thursday, 28 March 2019

Dil me ghar,...दिल मे घर....💐(by guru)

उसकी बात मेरे दिल मे घर कर गई
उसने झूठा सन्देसा भेजा कि वो मर गई

इतनी तो सस्ती नही मोहब्बत यकीन मानिए
कि चार बातें सुनी और डर गई

मेरे जिंदा रहते वो मर जाये ये मुमकिन नही
पहले भी ऐसा मज़ाक करके वो कई बार मुकर गई

तेरी साँसे कम पड़ें तो मेरी साँसों को सुनना
महसूस होगा कि मेरी सांसें तेरे दिल मे उतर गई

रोज़ फोन करने का ठेका बस "गुरू" का थोड़े ही है
कल मत कहना कि नाराज़गी भारी पड़ गई

उसकी बात मेरे दिल मे घर कर गई
उसने झूठा सन्देसा भेजा कि वो मर गई

"गुरू"

Wednesday, 23 January 2019

Nadani....नादानी (by guru)

मुझसे ऐसी भी ना नादानी हो
कि किसी ओर से बेमानी हो

नज़रों में इतना भी ना गिरा
 पुरानी तस्वीरें देख के हैरानी हो

मोहब्बत के नाम पर दिल्लगी मंज़ूर नही
मुझसे करे मोहब्बत तो मेरी ही दीवानी हो

जज़्बाती हूँ,हालात नही संभलते मुझसे
ज़रूरी नही कि वो हर बार सयानी हो

आशिक नया,महबूब नया,आशिकी नई
उम्मीद रहती है कि मोहब्बत पुरानी हो

पेड़ो की सजावट में फूल नही काटे जाते
ज़रूरी नही खुशबू से भी बागबानी हो

यहाँ बाज़ारों में सिंदूर सस्ता बिकता है
मत बताओ तुम कितना खानदानी हो

"गुरू"के तेवर को बग़ावत भी मंज़ूर
ज़रूरी नही कि हर बार ग़ुलामी हो

"गुरू"

Saturday, 15 December 2018

त्यौहार का दिया…tyohar ka dia (by guru)


                       -----*- त्योहार का दिया-*-----
            (कल्पना कीजिये की आप घर की मंडेर पर रखे हुये एक दिये हैं,,)

तेरे मायके की मंडेर पर रखे दिये सा हूँ
वो दिया जो त्योहार पर जलाया जाता है
बस एक बार ....ओर उसके बाद किसी को कोई खबर नहीं
कि जल भी रहा है या नही

कुछ दिन तक यों ही पड़ा रेहता हूँ मंडेर पर
कभी-कभार हवा से उलट-पलट जाता हूँ
पंछी,मुझे चोंच मारते हैं
इस लालच मे
कि पलटे दिये के नीचे कुछ तो मिलेगा

वो बाती ओर तेल जो तुमने जगमग के लिए डाला था
वो अब मुझे पीड़ा देने लगता है
क्यूंकी
अब उसमे चींटियाँ लगने लगती हैं

मौसम बदला रूत बदली ,मैं मौसम से बेमेल सा हूँ
दिन मे धूप ओर रात मे कोहरा दोनो झेलता हूँ
जब बीत गए कुछ दिन,कुछ रात
तब आई बरसात ;
रात के कोहरे से ठिठुरता हुआ मैं,पानी से भर गया

तुम्हारे घर की छत पर बंदर किस लोभ मे आते हैं?
मुझे उठाते हैं...चबाते है
फेंक जाते हैं ; तोड़ जाते हैं
मेरे शोभामयी किनारों को ,जो तुम्हें कभी पसंद थे

तुम्हारे घर के नन्हें-मुन्नों ने मुझे देखा तो अच्छा लगा
फिर उन्होने मुझे ठोकर मारी
तब निराशा हुई
मैं जा टकराया तुम्हारी मंडेर के छोर से
नीचे जा गिरा ; टुट गया

तुम्हारी मम्मी कि नज़र मुझपर पड़ी थी
जब उनकी चप्पल मुझपर चढ़ी थी
मुझे पहले गाली-गलोच किया गया
क्यूंकी मैं अपनी जगह पर नहीं था
फिर झाड़ू से मुझे नई जगह दी गई
मैं मंडेर की जगह छत के कोने मे सिमटा पड़ा हूँ

मैं दोबारा तब याद आऊँगा
जब मन मार कर उठाया जाऊंगा
डस्टपैन ओर फूलझाड़ू के साथ
फेंक दिया जाऊंगा कूड़ेदान मे
अपमान से

सम्मान से तुम्हारी काम वाली बाई मुस्कुराएगी
कचरे के नाम पर मुझे बाहर फेंक कर
वही कचरा,जिसने त्योहार पर
तुम्हारा घर जगमगाया था
खुद को जलाकर
इतने दुख सहकर
सिर्फ इस इंतज़ार मे कि
इसी बहाने तुम्हें रोज़ देखता रहूँगा

चला गया इसी दुख के साथ कि
काश मुझे फेंकने तो तुम आ जाती
ओर इस आशा के साथ कि
अगले त्योहार फिर आऊँगा
खुद जलकर तुम्हारा घर रोशन करने के लिए
तुम्हारे मुस्कुराते चेहरे को देखने के लिए

Friday, 30 November 2018

Mohabbat.....मोहब्बत...by guru

दिल से तेरी याद भुलाई नही जाती
मोहब्बत तो आती है मुझे,सियासत नही आती

तेरे फैसले में मेरी रज़ामन्दी,मेरी मर्ज़ी से नही
चाहत तो आती है मुझे,बगावत नही आती

मन्नत पूरी ना हुई तो तुम ख़ुदा बदल बैठे
ईबादत तो आती है मुझे,ख़ुदाई नही आती

जुदाई के बाद का आलम कैसे बयाँ करूँ
यादें तो आती हैं,कयामत नही आती

तोहफे में मिली बेवफाई के बाद,आज तक
तूँ बुरी तो लगती है मगर भुलाई नही जाती

ज़ेहन में चलता रहता है यादों का सिलसिला
तन्हा हो जाता हूँ फिर भी तन्हाई नही आती

मुद्दत तक लेटकर शिद्दत से तेरी तस्वीर देखना
आसुँ तो आते हैं"गुरू",राहत नही आती

Thursday, 29 November 2018

मैं....main ….by guru

मैं तुम्हे अतिप्रिय था
मुझसे ही तुम्हारा सुख-दुख था
मैं ही समय,मैं ही कलेंडर
मैं ही तुम्हारा सब कुछ था
प्रेम को तुमने युद्ध सा जाना
तुम जीती मैं गया हार
तुम्हारा कुछ सालों का प्यार... प्रिय...कुछ सालों का प्यार

कुछ साल तो सब कुछ था
कुछ साल बाद बचा कुछ भी नही
तब तक मुझसा कोई भी नही था
अब मुझसा दिखता तुम्हे मैं भी नही
दिमाग से बड़ा कोई विश्वासघाती नही
न दीवाने दिल जैसा कोई लाचार...प्रिय
तुम्हारा कुछ सालों के प्यार प्रिय...कुछ सालों का प्यार

दूजो के लिए जीवन सारा
मेरे लिए एक मुस्कान भी नही
मैं वही रहा,तुम बदल गई
भले मुझे तुम जीवन का भूला-बिसरा किस्सा रखो
पर तुम्हारे जीवन मे जितना मेरा है,उतना तो हिस्सा रखो
इसपर ना करो तकरार प्रिय
तुम्हारा कुछ सालों का प्यार प्रिय.. कुछ सालों का प्यार

बेशक तुम कल में बदल जाना,लेकिन मैं आज में अटल रहूँगा
मैं कल तुम्हारा था,आज तुम्हारा हूँ,तुम्हारा ही कल रहूँगा
ये "गुरू"का वचन नही,सिद्धांत है
तुम्हारा प्रेम मेरी शुरुआत,वही अंत है
मेरे प्रेम में सब कुछ तेरा,बिन प्रेम मुझपे तुम्हारा तिनका भर नही अधिकार प्रिय....
कुछ सालों का प्यार तुम्हारा...कुछ सालों का प्यार प्रिय...कुछ सालों का प्यार

Wednesday, 28 November 2018

मैं संवाद चाहता था…(main sanwad chahta tha) by guru

मैं संवाद चाहता था,तुम विवाद कर बैठी
भूलकर अच्छी यादें,बुरी सब याद कर बैठी
साल भर तुमसे मिलने की याद में मुस्कुराया मैं
सालभर बाद मिलकर भी तुम अपवाद कर बैठी

भूलकर मेरी चाहत,गैरों से मोह लगा बैठी
अपने शहर में कम दिखती थी,अब अहमदाबाद जा बैठी
सोचता था कि मिलोगी तुम,तो मुस्कुराओगी
साल बाद मिलकर भी,तुम नज़रें चुरा बैठी

लड़खड़ाकर कदम मेरे,अपने कदम सम्भाल बैठी
सारे ही गीले-शिकवे मेरी झोली में डाल बैठी
सालों तक रिश्ते में तुमसे शराफत क्या बरती
मेरे बारे में तुम गलत वहम पाल बैठी

मेरी ओर खुद की ज़िंदगी को बेहाल कर बैठी
मोहब्बत प्रेम का बंधन था पर तुम जाल बुन बैठी
गिला तुमसे नही है कि मुझसे बेवफा थी तुम
गिला है कि सच भुलाकर दूसरों का झूठ सुन बैठी


तुम कई बार बदली हो,अभी तक हम नही बदले
तुम्हारे ज़ुल्म नही बदले,हमारे मरहम नही बदले
हमारी ओर तुम्हारी मोहब्बत में फर्क रहा इतना
तुमने ज़ुल्म नही बदले,”गुरू” ने सनम नही बदले

Monday, 24 September 2018

Accha hota.







जान लेकर भी ये सिलसिला तोड़ देती तो अच्छा होता
दोनो में से किसी एक को छोड़ देती तो अच्छा होता....

तेरी चुप्पी ने मुझसे मेरे कई अपने छीन लिए
कुछ पल चुप्पी तोड़ देती तो अच्छा होता

तेरी मुस्कान से अच्छा दुनिया मे कुछ नही ,सच है
एक मुस्कान भी मेरे नाम होती तो अच्छा होता

अच्छा होता ज़हर हलक में मेरे उतार देती तुम
बेवफाई से बेहतर मुझे मार देती तो अच्छा होता

"गुरू" को ग़म देकर हंसने वाली खुश रहो
कुछ ग़म खुद भी उधार लेती तो अच्छा होता