Monday, 5 June 2017

मेरी याद तुम्हे रुलायेगी ज़रूर (Meri yaad tumhe rulayegi zarur)





मेरी याद तुम्हे रुलायेगी ज़रूर
मेरे फोन पर तुम्हारी काल आएगी जरूर

यादों को ज़ंग नही लगता
बात तुम्हे समझ आएगी ज़रूर

गिले-शिकवे,रुसवाईयाँ लाख  मुझसे
भूल के एक दिल मुझे मनाएगी ज़रूर

प्रेम या नफरत,जो रिश्ता मुनासिब मुझसे
नाम मेरा सुनकर मुस्कुराएगी ज़रूर

एक पल ऐसा भी आएगा ,वादा है तुझसे
  "गुरू"के लिखे गीत गुन-गुनाएगी ज़रूर

                                                                  "गुरू"

Monday, 29 May 2017

जिंदगी कैसी लगती है

मेरे सीने से लगकर रहने वाली ,अब कहो रातें कैसी कटती है
मुझसे दूर जाकर के कहो, जिंदगी कैसी लगती है

क्या अब भी मुझको याद करके नींद में ही मुस्काती हो
क्या अब भी सपनो में मुझसे मिलने आती हो
क्या मेरी कमी बाँहों में तुमको खलती है
मुझसे दूर जाकर के कहो, जिंदगी कैसी लगती है

क्या सुबह जागकर बिस्तर पर अब भी मुझे ढूंढती हो
क्या तकिये को मेरा माथा समझ प्यार से चूमती हो
साथ खड़े न हो हम-तुम तो दुनिया बेरंगी लगती है
मुझसे दूर जाकर के कहो, जिंदगी कैसी लगती है

क्या अब भी तुमको दर्पण में मेरी छवि दिखाई देती है
अब भी तन्हाई में मेरी आवाज सुनाई देती है
अब नैनो में मैं नहीं,कहो पलकें कैसे सजती है
मुझसे दूर जाकर के कहो, जिंदगी कैसी लगती है

क्या अब भी मेरे बिना तुम्हे सब खाली-खाली लगता है
क्या मेरी याद में अब भी आँखों से होंठो तक आंसू छलकता है
जिस दिल में"गुरू"नही,उसकी धड़कन कैसे धड़कती है
मुझसे दूर जाकर के कहो, जिंदगी कैसी लगती है

चलो सब छोडो बस इतना कहो,याद भी हूँ या भूल गई
यों दिल से मुझे निकाल दिया,ज्यों पैरोँ की धूल गई
मुझे कांटा समझने वाली,अब राहें कैसी लगती हैं।।
मुझसे दूर जाकर के कहो, जिंदगी कैसी लगती है

मुझसे दूर जाने का डर,अब तुमको नही सतायेगा
मुझसा चाहने वाला कोई तुमको कभी न मिल पायेगा
तुमको भी बेताबी रहेगी जैसे मुझको बेचैनी अखरती है
मुझसे दूर जाकर के कहो, जिंदगी कैसी लगती है


Sunday, 21 May 2017

तेरे चेहरे की मायूसी

तेरे चेहरे की मायूसी अब भी ज़हन में है
उदासी अब भी मेरे मन में है

मैंने कपड़ों की तरह ज़िस्म नही बदले
तेरी खुशबू अब भी मेरे तन में है

कुछ ऐसा चलाया किस्सा बेवफाई का तुमने
तुम्हारा दिया हुआ धोखा,अब भी चलन में है

वो जूस के साथ आलू के परांठे तेरे
रुखसत होकर भी तूँ मेरे रहन-सहन में है

वो बात न होगी,स्वर्ग की परियों में गुरू
जो बात मेरी परी जैसी सनम में है

तेरे जाने के बाद को जीना,जिंदगी  कहता नही गुरू
या जिंदगी तेरी बाँहों में थी,या फिर कफ़न में है

Friday, 31 March 2017

गैरो की बाँहों

जाते जाते भी मुझसे दगा कर गई
गैरों की बाँहों में वफ़ा कर गई

विदाई से पहले बात जी भर की मुझसे
जाते-जाते तन्हाई में किसी ओर से मिल गई
गैरो की बाँहों में वफ़ा कर गई

यूँ तो सब थी खबर,ना बताया मगर
जुबाँ से अपनाया, दिल से मुकर गई
गैरों की बाँहों में वफ़ा कर गई

आज भी लोग जानते है तुम्हे मेरे नाम से
मुझसे बेवफाई,किसी से वफ़ा,किसी से विवाह कर गई
गैरों की बाँहों में वफ़ा कर गई

तुझे बद्द दुआ देने को अब भी दिल राजी नही
सदमे में हूँ तुम इतना बुरा मेरे संग कैसे कर गई
ग़ैरों की बाँहों में वफ़ा कर गई

दो ही दिन थे शादी के,फिर जितना मर्जी बिखर लेती
अंदाजा नही तुम्हे तुम क्या कर गई
ग़ैरों की बाँहों में वफ़ा कर गई

"गुरू"की आँखों में इतना उजाला न आया समझ
स्वर्णा समझी थी,रेत सी बिखर गई
गैरों की बाँहों में वफ़ा कर गई

Monday, 13 March 2017

इस से बुरा अब क्या लिखूं...

इस होली हम संग नही इस से बुरा अब क्या लिखूं
इस होली तुम किसी और की हो,इस से बुरा अब ये भी है।

अब तेरी तस्वीर दिखी,ससुराल में पहली होली की
आँखों से आंसू झलक उठे,सीने पे लगी मानो गोली सी
लम्हे सारे चाक हुए,इस से बुरा अब क्या लिखूं
यादें सारी उम्र चुभेंगी, इस से बुरा अब ये भी है।

ये आसमानी सा रंग परी, चढ़ा तेरे रंग गोरे पे
किस्मत के रंग सफेद हुए,चढ़े मरजाने "गुरु"निगोड़े पे
ये रंग न मेरे हाथ लगा,इस से बुरा अब क्या लिखूं
ये हाथ तुझे मंजूर न था,इस से बुरा अब ये भी है।

तेरे चेहरे की मुस्कान सखी,अब भी उतनी ही खिलती है
खड़ी किसी के संग होजा,मुझसे अच्छी न जोड़ी सजती है
तेरे जोड़ी मेरे साथ नही,इस से बुरा अब क्या लिखूं
इस जोड़ी में वो बात नही,इस से बुरा अब ये भी है।

ये लाल गुलाल का बवाल,जो गाल पे तेरे छाया है
छूकर के किसी ने तुमको,दिल को मेरे तड़पाया है
इस तड़पन में तेरा हाथ है,इस से बुरा अब क्या लिखूं
तू किसी और के साथ है इस से बुरा अब ये भी है।

मेरे सपनों को बेरंग करके,क्यों किया मतभेद परी
मेरे सब रंग तेरे संग गये,जीवन हो गया सफेद परी
तुम पहले सी नहीं रही,इस से बुरा अब क्या लिखूं
"गुरू"अब भी न बदल सका, इस से बुरा अब ये भी है।।।।।

Tuesday, 28 February 2017

मेरे दिल के हर कोने में शोना तेरी याद बसी

मेरे दिल के हर कोने में,शोना तेरी याद बसी है
जिंदगी तो तेरे संग थी,मौत तेरे बाद बची है


तुम जब सबसे छिप छिपकर घर मिलने मुझसे आती थी
कोयल जैसे कूकती,चिड़िया सी चहचहाती थी
कमरे,रसोई,बरामदा,सबमे तुमसे मुलाकात बसी है
मेरे दिल के हर कोने में,शोना तेरी याद बसी है


हम दोनो के घर के चौबारों ने तो खुद में एक इतिहास रचा है
घर भले ही दूर हमारे,चौबारों ने हमको पास रखा है
मेरे घर की सब दीवारों में तेरे हंसने की आवाज बसी है
मेरे दिल के हर कोने में शोना तेरी याद बसी है


अब तक सब अपनी मर्जी थी,या समझो मजबूरी थी सब
बिना मंज़िल के खत्म हुए आकर अपने रास्ते अब
भली-बुरी जैसी भी है,जिंदगी अपने हाथ बची है
मेरे दिल के हर कोने में शोना तेरी याद बसी है

तेरे जाने के बाद तो दुनिया सी बर्बाद हुई है
कभी खत्म ना होने वाली सबसे काली रात हुई है
"गुरू"के पास तो अब खाली कुछ तस्वीरों की सौगात बची है

मेरे दिल के हर कोने में शोना तेरी याद बसी है।।।।।।

Sunday, 26 February 2017

दर्द चाहकर भी ना सह सका

दर्द चाहकर भी ना सह सका
बिना रोए रह ही ना सका
ऐसा नही की मैं पत्थरदिल हूँ
बस हालात ऐसे थे कि कह न सका

आँख से पानी दिल से खून के आंसू रोया हूँ
शादी की खबर से लेकर अब तक चैन से न सोया हूँ
काम और शौंक,ज़रूरत और भी हैं मेरी
पर कुछ याद नही है तुझमे इतना खोया हूँ

पुरानी यादो में जाकर खुद से कहता हूँ की काश सब बदल जाये
मैं तेरे और तुन मेरे मुताबिक ढल जाये
यादों से निकलता हूँ तो दहाड़ मारता हूँ
अ-ख़ुदा जैसे भी हो बस ये वक़्त निकल जाये

कुछ भी खाया नही
ऐसा नही के खुद को समझाया नही
मेरी खुद की दलीलों में बहुत दम था
पर न जानें क्यू खुद की समझा पाया नही

"गुरू" तो हर बार बेबस सा बनकर रह गया
कभी तेरे तो कभी खुद के हिस्से का ग़म सह गया
रोते-बिलखते आत्मा मर गई मेरी
बनकर मैं एक ज़िंदा लाश खड़ा रहा गया

विदा तुम शहर से हो रही हो
खालीपन मेरे दिल में आ रहा है
आजमाकर नुस्खे सब देख लिए "गुरु"
ये दर्द है कि फिर भी बढ़ता जा रहा है

मिलो किसी मोड़पर तो मुस्कुराना ज़रूर
याद आती है या नही,आँखों से बताना ज़रूर
तेरी आजमाइश ने मेरी जिंदगी काली बना दी
मेरे मुक़ाबले अब नए रिश्ते को आजमाना ज़रूर

एक मौका मिला और तुमने जिंदगी छाँट ली
मेरे हिस्से में ग़म और अपनी झोली में खुशियां बाँट ली
आज तक तो तुम्हारे सिवा किसी को महसूस नही किआ
तुमने आगोश बदल बदलकर ज़िन्दगी काट ली

दिल दुखी है मगर फिर भी दुआ दे रहा है तुम्हे
खुदा करे की किसी मौड़ पर कभी मिलो तुम हमे
खुश रहने की मेरी दुआ को साकार करना
बस भूल जाओ तुम मुझे,भूलता हूँ मैं तुम्हे

छोड़ देंगे अब तेरा इंतेजार करना
ना मैं करूँगा ना तुम मुझे प्यार करना
बस आखिरी बार वही पुरानी दुआ मांगता हूं
नये जीवन में खुश रहना और खुश रखना