Monday, 3 April 2023
तुम ख़ास…हो…तो….हो ….
Tuesday, 21 March 2023
थक गए….thak gaye….a poem by Guroo
मनाया भी…जताया भी…अब तो रो-रो के थक गए
तुम्हारे थे…तुम्हारे हैं…तुम्हारे हो-हो के थक गए
तुम्हारी नादानियाँ तुमसे अधिक हमने भुगती हैं
आवारगी,बेशर्मी,बेवफ़ा मेरी आँखों को चुभती है
तुम्हारी हँसी नहीं रुकती,हम रो-रो के थक गए
तुम्हारे थे…तुम्हारे हैं…तुम्हारे हो-हो के थक गए
अंधा समझती हो सही,मगर पागल तो ना समझो
मोहब्बत ना समझो ना सही,हमे आदत तो समझो
ख़ुद को ढूँढने निकले थे,तुमको खो-खो के थक गए
तुम्हारे थे…तुम्हारे हैं…तुम्हारे हो-हो के थक गए
समझता हूँ ,मेरे स्वालों पर खामोशी तुम्हारे पास रहती है
तुम्हें लगता है”गुरु” के मिज़ाज में सदा मिठास रहती है
अंधेरे में रहें कितना , तुम्हारी ख़ातिर सो-सो के थक गए
तुम्हारे थे…तुम्हारे हैं…तुम्हारे हो-हो के थक गए
Sunday, 5 March 2023
हंस…hans
ग़ुरूर तौबा कि तुमपर बगुले लाख मरते हैं
मगर ये समझो वो बगुले कइयों पर आँख रखते हैं
भले “गुरु “तुम्हारी आँख को कई साल खलता था
मगर एक हंस था जो बस…और बस
तुम्हीं पर मरता था……
Thursday, 19 January 2023
सच में मुझसे प्यार करोगी…
जब सच में मुझसे प्यार करोगी
छत पर मेरा इंतज़ार करोगी…
मैं आऊँ या ना आऊँ मिलने
छत पर पागल सी फिरोगी
मेरी “ना”चाहे लाख बार हो
तुम “हाँ”हर बार करोगी
मुझमें ही तुम्हें चाँद दिखेगा
कमी सारी दरकिनार करोगी
हर जगह नज़र मैं ही मैं आऊँगा
रातों को मेरे लिये बेक़रार रहोगी
बाज़ार में नये आशिक़ रोज़ मिलेंगे
आँखें बंद कर रास्ता पार करोगी
साल दो साल चाहे जितना मन बहलालो
ज़रूरत में “गुरु” को याद करोगी
Monday, 9 January 2023
Mujhe fir se chaho mat…. मुझे फिर से चाहो मत Apoorn by guroo
उलझी-उलझी सी ज़िंदगी,और उलझाओ मत
झूठे मन से मोह लगाके,मुझे फिर से चाहो मत
नेह लगाके प्रियतम तुमसे,झूठी “हाँ” को “हाँ”माना
बनके गुलाबी डोर सखी,पतंग सा उड़ाओ मत
झूठे मन से मोह लगाके,मुझे फिर से चाहो मत
तन बाँटा कइयों में,मन तक में आज कोई और सखी
“अब भी मेरी हो” बोल-बोलकर,मुझे चिढ़ाओ मत
झूठे मन से मोह लगाके,मुझे फिर से चाहो मत
तन सबका,मन उसका, धन-धन “गुरु” से कहना क्या
मुश्किल से तो दूर किया है,फिर से दिल में समाओ मत
झूठे मन से मोह लगाके,मुझे फिर से चाहो मत
“गुरु”
Thursday, 22 December 2022
तुम…..Tum….a poem by “guroo “
शुरू-शुरू में मेरे साथ इतनी ज़ज़्बाती थी तुम…
मैं जैसा कहता था,वैसी हो जाती थी तुम…
दूसरों से मेरी बुराई कर रही हो तो पहले ख़ुद से पूछना
मुझे अच्छे से जानती हो,या यूँ ही मन हल्का कर रही हो तुम…
किसी और की होकर दोबारा मेरी तरफ़ मत आना
बार-बार किसी और की होकर,अब मेरी नहीं रही तुम…
तुमसे बात करने का दिल तो बहुत करता है मगर…
बातें रोक लेती हैं,जो दूसरों से मेरे बारे में किया करती हो तुम…
मुझे डर है कि तुमसे बात करके फिर से तुम्हारा ना हो जाये”गुरु”
दूसरों का होकर भी तुम्हारा रहूँ, धोखा देकर दूसरों की रहो तुम…..
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बदलता है जब भी मौसम,तुम्हारी याद आती है धूप से शाम होती है ,तुम्हारी याद आती है ऐब दो पाल रखे हैं , एक तुम और एक तुम्हारे रंग की चाय चा...
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हम उनके दोगलेपन के बारे में क्या जान गए वो तो बुरा ही मान गए पीठ पीछे करते रहे ,मारने की साज़िश सामने देखा तो हमारी लंबी उम्र पर क़ुर्बान ...
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दंड-विधान मुझे समझना है वह दंड विधान जो मेरे गलती करने पर बनाता है मुझे पापी और तुम्हें महान एक बंधन मे बंधे हम दोनों बराबर थे दोन...



