Thursday, 21 June 2018

ज़िंदगी





कोने से फटे वो ख़त सारे
जिनकी लिखाई धुँधली पड चुकी
तेरे जहन में मेरी यादों जैसे हैं
सारी यादें धुँधली पड़ चुकी
मेरा दिल तेरी यादों का घर है
इल्ज़ाम सारे अब भी मेरे सर है
नाराज़ ना हो ज़िंदगी...नाराज़ ना हो ज़िंदगी

तेरी शिकायत जायज़ हैं
मेरे सारे शिकवे झूठ सही
फिर से मनाऊँ..जी भर के
तुँ नैन भिगोकर रूठ सही
तेरे संग सारे तीज त्योहार
तुम पर सब कुछ दूँ वार
तुम बन गये हो ज़िंदगी..बन गये हो ज़िंदगी

“गुरू”ग़ुरूर क्या करे
बात जब तेरे साथ हो
क्या दिन,सदी,वार गिनू
हाथ में जब तेरा हाथ हो
तुम लाख हो,मैं खाख हूँ
तुम मौसम हो,मैं बरसात हूँ
मैं तेरी ज़िंदगी..तुम मेरी ज़िंदगी...

Saturday, 13 January 2018

जीते जी मर जाऊँ कैसे

ख़ुद का बोझ उठाऊँ कैसे
जीते जी मर जाऊँ कैसे

तन से तो हम दूर हुए सखी
मन से तुम्हें भगाऊँ कैसे
जीते जी मर जाऊँ कैसे

यूँ तो सब कुछ बहुत अच्छा है
पर ख़ुद को ये समझाऊँ कैसे
जीते जी मर जाऊँ कैसे



हर तरफ़ तुम ही तुम दिखती हो
नज़रें तुमसे चुराऊँ कैसे

बंद नैनो में भी तुम बंद हो
इसका समाधान लाऊँ कहाँ से
जीते जी मर जाऊँ कैसे

‘गुरू’रोग का दर्द तुम्हीं हो,मर्ज़ तुम्हीं हो
ये दुनिया को बतलाऊँ कैसे
जीते जी मर जाऊँ कैसे

Tuesday, 17 October 2017

दिवाली पर खास


इस दिवाली कुछ खास करते हैं
फिर से एक दूसरे पर विश्वास करते हैं

लोग बताते हैं तुम्हे मुझसे शिकायत बहुत है
चलो इस बार आपस मे बात करते है


ये तो सच है कि दूरियां समेटी नही जा सकती
फिर भी दिल से पास होने का अहसास करते हैं

पुरानी यादें साथ है या भूल गए हो
फोन मिलाओ,सारी रात बकवास करते हैं

ये ख्याल जाकर के कहीं दफन क्यों नही होते
हंसते-खेलते रिश्ते का सत्यानास करते हैं

हर बार "गुरू"ने जख्मो की बात की है
आज खुशियों का हिसाब करते हैं

इस दिवाली कुछ खास करते हैं
एक दूसरे पर विश्वास करते हैं।

Sunday, 8 October 2017

जन्मदिन

अपने जन्मदिन को बेकार मत करना
मेरी शुभकामनाओ का इंतजार मत करना

रस्ते बोल-चाल के तुमने बन्द किये हैं
कभी मिलो तो मुझसे तकरार मत करना

मुझे दिन भी याद है और तारीख़ भी याद है
पर तुमने कहा था,फोन बार-बार मत करना

करवाचौथ ओर ऊपर से जन्मदिन तुम्हारा
भूख मेरी,ओर लम्बी उम्र पर अधिकार तुम करना

"गुरू"तेरी मुस्कान पर सदके  वारि-वारि
मालिक मेरी प्रेम दुआएं स्वीकार तुम करना।


Tuesday, 1 August 2017

बस तेरी कमी के साथ..

पूरा आसमा मिला,मगर गीली ज़मीन के साथ
ये खेल खेलना था खुदा ने हम ही के साथ
कहने को देने वाले ने कोई कसर नही छोड़ी
सब कुछ दिया बस ....तेरी कमी के साथ

इस ज़मीं पर मुझसा दूसरा खुदा ने बनाया न होगा
मुझ जैसी तकदीर का हिस्सा किसी पर आजमाया नही होगा
अपने आप को किसी शहजादे से कम नहीं आंकता हूँ मैं
होंठो पर हंसी रखता हूँ,आँखों में नमी के साथ

 तेरी भी मुझसे ज्यादा किसी से बनती नहीं होगी
जोड़ी सिवा मेरे किसी से जचती भी नहीं होगी
तूँ आज भी मुझसे ज्यादा किसी को नही चाहती
जिंदगी गुजरेगी अब इसी गलत फहमी के के साथ

 कभी तो फोन कर खबर जान "गुरू"की
तुमने खत्म की मोहब्बत जो मैंने शुरू की
तेरी मज़बूरियों पर तो सो बार पर्दा किया था मैंने
मेरा ही दामन जला डाला तूने बड़ी बेरहमी के साथ

Tuesday, 6 June 2017

लगता है तु आस-पास कहीं है

शहर की हवा में खुशबू सी है
लगता है तु आस-पास कहीं है

सितारे भी आज ज्यादा चमक रहे हैं
अपनी मस्ती में परिंदे चहक रहे हैं
मेरा वहम है या सब सही है
लगता है तूँ आस-पास कहीं है

आज छत पर ठंडी हवा कैसे चल रही है
ये फूलों की डाल अपने आप क्यों खिल रही है
मौसम बदल गया या तबियत में कोई कमी है
लगता है तूँ आस-पास कहीं है

ये फ़िज़ा अपना रंग कब तक दिखाएगी
इंतेजार में हूँ,तूँ नज़र कब आएगी
"गुरू"को शुरू से तुम्हारी ज़रूरत रही है
अहसास होता है तूँ, आस-पास कहीं है।

तेरी मौजूदगी इस मौसम में शुमार तो है
इस दूरी में भी मुझे तुमसे प्यार तो है
मैं भी सही हूँ,मौसम भी सही है
ये दावा है तूँ आस-पास कहीं है

बस सफर तुम खत्म हुए,आकर एक दीदार पर

बस सफर तुम खत्म हुए,आकर एक दीदार पर
जिसको दिल से चाहा उसको जीते खुदको हार कर

सारे शहर में चक्कर काटे, काश कहीं मिल जाओ तुम
नहीं मिले तो रोकर बैठा,आखिर मन को मारकर

जब देखा तुम तो घर पर हो,खुद पर ही मुस्काया मै
खुद की गलती पर क्या करता,खुद ही खुद को झाड़कर

ध्यान तुम्हारा और कहीं था और मेरे नैनो में थी तुम
पलको में तुमको ले चले,नैनो में छवि उतारकर

अब तक मैं इंतेजार में हूँ,काश कभी ढूंढोगी मुझे
तेरे भी नैना बरसेंगे,"गुरू"के दीदार पर