Saturday, 26 February 2022

मेरा दिल है दिल,तेरे शहर का बाज़ार नहीं (Mera dil hai dil,tere shehar ka bazar nahi)



 

किसी कीमत पर बिकने को तैयार नहीं

मेरा दिल है दिल,तेरे शहर का बाज़ार नहीं

अपनाकर छोड़ा,छोड़कर अपनाया फिर ठुकरा दिया
महबूब हूँ  किसी नाटक का किरदार नहीं

ना चाहा तूने तो कहीं और चला जाऊँ
होगा व्यपार कोई,मगर प्यार नहीं

क़त्ल का शौंक हो तो,जिस्म इस्तेमाल करो
कहते हैं निगाहो से खतरनाक कोई हथियार नहीं

दिल ही दिल में चाहकर कभी कहा ही नहीं
या तो तेरी नियत में खोट है या तुम्हे प्यार नहीं।।

                                                                     ‘गुरू

Friday, 25 February 2022

क्या होगा (kya hoga) by Guru

 मुलाक़ात कर,बात कर, नज़रे दिखाने से क्या होगा

अपने ख्याल जोड़ कागज़ पर,मेरे ख्याल चुराने से क्या होगा

कहा ना लफ्जो में गर कुछ भी,दिल में चाहने से क्या होगा
जिस दिल में कोई पहले बसा हो,उसमे मुझे बसाने से क्या होगा

मुहब्बत दफन सीने में,कभी हमसे ना कहा कुछ भी
सामने आ,इज़हार कर,दिल में छिपाने से क्या होगा

किसी शायर के नगमो को पढ़ना आम सी बात है
समझ लिखा क्या है,लफ्ज़ चुराने से क्या होगा

पता तुमको भी है सबकुछ,खबर मुझको भी है सारी
अब तलक कुछ ना हुआ,आगे बताने से क्या होगा

ख्याल में साथ मेरे तुमने मेरे कई पल गुज़ारे होंगे
नज़रों से मिलकर,हक़ीक़त में दो पल बिताने से क्या होगा

उम्र की आग ही ऐसी है,जलती है जलाती है
अपने साथ इस आग में मुझे जला दोगे तो क्या होगा

जब सपने खुद हक़ीक़त में बदलने को तैयार बैठे हैं
फिर हक़ीक़त को सपनो में बदलने से क्या होगा

समझदार हो तुम भी कोई नादान तो नहीं हो
समझे अब भी नहीं तो आगे समझाने से क्या होगा।।।।


                                                                 "गुरू"

Tuesday, 22 February 2022

कही सुनी सी बात (kahi suni si baat) by guru

 


दिल में जुड़ते रिश्तों पर होता है आघात

मन में धर लेता जब कोई,कही सुनी सी बात

रिश्तों में चमकता प्यार कभी,कभी अँधेरी रात
आँखों ही आँखों बतियाते,दिल की ये करामात

साजन के घर जाना कभी,ले खुशियों की बारात
सम्भव हैं बंट जाएंगे,दिल के दो दो हालात

कांच सा बिखरा दिल प्यारा,प्यार की ये सौगात
ज़नाज़ा कहूँ प्यार का,या आंसुओ की बारात

टूटे दिल मिल जाएँ तो,बंट जायेंगे ज़ज़्बात
कान के कच्चे तोड़े रिश्ते ,कहाँ गया विश्वास।।

                                                            


"गुरू"

Sunday, 19 December 2021

राज़ पुराना रखा (raj purana rakha) by guru



उसने अपने दिल में छिपाकर राज़ पुराना रखा
नज़रे फेर ली ,पर देखने का अंदाज़ पुराना रखा

ग़ैरों ने रुलाया तो उसे याद हमारी आई
हमने भी फ़ोन कई बदले,पर नम्बर पुराना रखा

वो सालों बाद मुझसे मिली तो भी झगड़ पड़ी 
नई मुलाक़ात का भी उसने आग़ाज़ पुराना रखा

उसने मेरी दी स्वेटर अब तक सम्भाल रखी होगी
मैंने भी कुर्ते का बटन बदला,पर काज पुराना रखा

खुद की ग़लतियों पर वो शर्मिंदा तो बहुत थी
पर“गुरू” ने भी मोहब्बत पर नाज़ पुराना रखा

Wednesday, 1 December 2021

आदत…(aadat) by guru



आदत

 

अक्सर पूछ लेती हो 

कि हमारा क्या रिश्ता है ???

एक दूजे के लिए दिल मे इतना प्यार क्यूँ बस्ता है ???

 

भरी भीड़ मे देख के तुझको मेरा दिल हँसता है 

बिन तुझसे बात किया एक दिन भी नहीं कटता है 

तेरे मेरे बीच मे.....”आदत का रिश्ता है....

 

तुम मेरी ओर मैं तुम्हारी आदत हूँ ....

आदत जो छुड़ाए नहीं छुटती

जिसे सब कहें की बुरी लत है 

छोड़ दो...नुकसान देने वाली आदत है 

लेकिन...सब जानकर भी...सच मान कर भी...

मन मार कर ही ...

ये ललक नहीं छुटती...

हम बुरे ही सही...मगर

एक दूसरे की आदत नहीं छुटती...

इस आदत के बिन ज़िंदगी मे क्या बचता है ...

आदत बुरी सही...भली सही ...लेकिन 

यही रिश्ता है....

 

एक दूजे से करने को जब बात ही नहीं होती 

तो भी भला हम बात क्यूँ करते हैं 

एक दूजे संग हँसकर हम दोनों 

अपनेपन का एहसास क्यूँ करते हैं 

क्यूंकी हमे आदत है .....एक दूसरे की.......

 

इतनी तो मोहब्बत नहीं की देखना जरूरी हो 

विडियो काल पर आँखें सेंकना ज़रूरी हो 

लेकिन .....एक दूजे को देखे बिन 

दिन तो ढल जाता है....पर रात नहीं होती............

क्यूंकी हमे आदत है एक दूसरे की ...

 

 

वो राज भी हम आपस मे बाँट लेते हैं 

जो दूसरों से ताउम्र छिपाते रहे हैं 

मज़ाक से लेकर हवस तक 

एक दूसरे की चाहतों मे निभाते रहे हैं .....

काम आते रहे हैं ...

क्यूंकी ...हमे आदत है एक दूसरे की.....

 

हवस से शुरू हुआ हमारा रिश्ता 

नफरत को पार करते हुये 

आदत तक आ पहुंचा है 

बस ...रिश्ते को निभाने की दोनों तरफ से 

चाहत बनी रहे.....

ताउम्र “गुरू” ओर तुम्हारी 

ये आदत बनी रहे............

आदत बनी रहे.........

                       गुरू

Monday, 18 October 2021

एक पुरानी तस्वीर…(ek purani tasveer) by guru


एक पुरानी तस्वीर...


जिसमे तुम नही हो....पर हो

और मैं हूँ तो सही...पर नही हूँ


सालों पुरानी ये तस्वीर ,तुमसे रिश्ते की याद है

पुरानी है...खास है...

इसी तस्वीर को तुमने सबसे पहले देखा था

यही मेरे लिए बहुत बड़ी बात है


तुम रस्ता भूल गई..मैं आज भी वहीं हूँ ...


एक पुरानी तस्वीर...


जिसमे तुम नही हो....पर हो

और मैं हूँ तो सही...पर नही हूँ


तुम...आज भी फोन की गैलरी में समाई हो

क्यों????क्या?? कभी समझ पाई हो??

इस फोन के पासवर्ड के अंदर का धन हो तुम

बड़े प्यार से छिपाई  हो


मेरे नैनो की हर तस्वीर में....मेरी तकदीर में

तुम नही हो....पर हो

और "गुरू" है तो सही...पर नही है....


Friday, 8 October 2021

इश्क़ की ग़लतियाँ (ishq ki galtiyan) by guru




इश्क़ में एक गलती भारी,और हम चार कर बैठे
एक बारी ही न संभले,हम कई बार कर बैठे…

हमने पहली गलती की,तुम्हें अपना बनाने की
प्यार जताने की,,सारे राज़ बताने की…
मगर तुम तो बस….तुम निकले
किसी मौक़े कसर छोड़ी नहीं,हमें नौच खाने की

ख़ता सारी भूलकर तुम पर एतबार कर बैठे
इश्क़ में एक गलती भारी,और हम चार कर बैठे

दूसरी गलती ये कर दी, कि एक बेवफ़ा को माफ़ कर दिया 
सब गुनाह भूले,पिछला सब साफ़ कर दिया
मगर तुम तो…..तुम्हीं निकले
वफ़ा को बेवफ़ा करके फिर से सब राख कर दिया

सौ बार वजह पूछी,पर तुम इंकार कर बैठे
इश्क़ में एक गलती भारी,और हम चार कर बैठे

गलती तीसरी ये थी,तेरे आंसू को सच जाना
तुम्हें परखा नहीं फिर से,तेरी बातों को सच माना
मगर तुम तो….फिर से तुम निकले…
सो हमने ही सही समझा…तेरे रस्ते से हट जाना

ख़ुद अपनी ही नज़रों में गुनहेगार बन बैठे…
इश्क़ में एक गलती भारी,और हम चार कर बैठे

ख़ता ये आख़री समझी,”गुरू” तुमको भुला नहीं पाया
तुमने अपनाया नहीं दिल से,और मैं ठुकरा नहीं पाया
सच में……तुम तो…..बस तुम ही हो….
तुम जैसी ढूँढ नहीं पाया,,किसी को अपना नहीं पाया

ज़िंदगी भूलकर सारी…मोहब्बत फिर एक बार कर बैठे
इश्क़ में एक गलती भारी,और हम चार कर बैठे….