Tuesday, 14 August 2018

Achcha lgta.....अच्छा लगता

Achcha lagta....💐

बिन मिले चल दिये,कोई बात नही
मिलकर जाते तो अच्छा लगता

महफ़िल में सब तेरे थे,मुझको झोड़कर
झूठे मन से अपना कह जाते तो अच्छा लगता

एक नजर देखा मुझको,वो भी मन को मारकर
उस पल भी गर मुस्काते तो अच्छा लगता

दिल ही दिल मे कोसा मुझको,मुँह से कुछ न बोलकर
मुँह पर मुझको दो-चार सुनाते तो अच्छा लगता

दो बार सामने से गुजरे,आते हुए,जाते हुए
सामने एक बार ठहर जाते तो अच्छा लगता

सुना है "गुरू"की मौत से उन्हें फायदा बहुत होगा
उनके लिए मर भी जाते तो अच्छा लगता

Friday, 29 June 2018

कुछ तो बता...ज़िंदगी


ये उलझे-उलझे से रास्ते
रुके क्यूँ हैं मेरे वास्ते
पल-पल बदलती उलझने
क़दम-क़दम पर हादसे
कुछ तो बता ....ज़िंदगी....

वो समझे कुछ ओर मैंने कुछ कहा
मेरा अपना दिल,मुझसे ख़फ़ा
सच-सच कहो,क्यूँ मौन हो
तुम्हें रुसवाइओ का वास्ता
कुछ तो बता ...ज़िंदगी.....

मेरे दर्द में भी प्यार है
दिल आज भी तैयार है
पर तुम बदल सी क्यूँ गई
क्यूँ ना पहले सी रही
बोल..मुझसे बात कर
कुछ तो बता...ज़िंदगी

“गुरू”ग़ैर बनकर रहा...रहने दो
दिल में जो ग़ुबार है...कहने दो
तुम ख़ुद सुनो, ओर जवाब दो
गुनाहों की सज़ा दो,या हिसाब दो
यूँ बवाल ना कर ज़िंदगी
कुछ तो बता ...ज़िंदगी

Thursday, 21 June 2018

ज़िंदगी





कोने से फटे वो ख़त सारे
जिनकी लिखाई धुँधली पड चुकी
तेरे जहन में मेरी यादों जैसे हैं
सारी यादें धुँधली पड़ चुकी
मेरा दिल तेरी यादों का घर है
इल्ज़ाम सारे अब भी मेरे सर है
नाराज़ ना हो ज़िंदगी...नाराज़ ना हो ज़िंदगी

तेरी शिकायत जायज़ हैं
मेरे सारे शिकवे झूठ सही
फिर से मनाऊँ..जी भर के
तुँ नैन भिगोकर रूठ सही
तेरे संग सारे तीज त्योहार
तुम पर सब कुछ दूँ वार
तुम बन गये हो ज़िंदगी..बन गये हो ज़िंदगी

“गुरू”ग़ुरूर क्या करे
बात जब तेरे साथ हो
क्या दिन,सदी,वार गिनू
हाथ में जब तेरा हाथ हो
तुम लाख हो,मैं खाख हूँ
तुम मौसम हो,मैं बरसात हूँ
मैं तेरी ज़िंदगी..तुम मेरी ज़िंदगी...

Saturday, 13 January 2018

जीते जी मर जाऊँ कैसे

ख़ुद का बोझ उठाऊँ कैसे
जीते जी मर जाऊँ कैसे

तन से तो हम दूर हुए सखी
मन से तुम्हें भगाऊँ कैसे
जीते जी मर जाऊँ कैसे

यूँ तो सब कुछ बहुत अच्छा है
पर ख़ुद को ये समझाऊँ कैसे
जीते जी मर जाऊँ कैसे



हर तरफ़ तुम ही तुम दिखती हो
नज़रें तुमसे चुराऊँ कैसे

बंद नैनो में भी तुम बंद हो
इसका समाधान लाऊँ कहाँ से
जीते जी मर जाऊँ कैसे

‘गुरू’रोग का दर्द तुम्हीं हो,मर्ज़ तुम्हीं हो
ये दुनिया को बतलाऊँ कैसे
जीते जी मर जाऊँ कैसे

Tuesday, 17 October 2017

दिवाली पर खास


इस दिवाली कुछ खास करते हैं
फिर से एक दूसरे पर विश्वास करते हैं

लोग बताते हैं तुम्हे मुझसे शिकायत बहुत है
चलो इस बार आपस मे बात करते है


ये तो सच है कि दूरियां समेटी नही जा सकती
फिर भी दिल से पास होने का अहसास करते हैं

पुरानी यादें साथ है या भूल गए हो
फोन मिलाओ,सारी रात बकवास करते हैं

ये ख्याल जाकर के कहीं दफन क्यों नही होते
हंसते-खेलते रिश्ते का सत्यानास करते हैं

हर बार "गुरू"ने जख्मो की बात की है
आज खुशियों का हिसाब करते हैं

इस दिवाली कुछ खास करते हैं
एक दूसरे पर विश्वास करते हैं।

Sunday, 8 October 2017

जन्मदिन

अपने जन्मदिन को बेकार मत करना
मेरी शुभकामनाओ का इंतजार मत करना

रस्ते बोल-चाल के तुमने बन्द किये हैं
कभी मिलो तो मुझसे तकरार मत करना

मुझे दिन भी याद है और तारीख़ भी याद है
पर तुमने कहा था,फोन बार-बार मत करना

करवाचौथ ओर ऊपर से जन्मदिन तुम्हारा
भूख मेरी,ओर लम्बी उम्र पर अधिकार तुम करना

"गुरू"तेरी मुस्कान पर सदके  वारि-वारि
मालिक मेरी प्रेम दुआएं स्वीकार तुम करना।


Tuesday, 1 August 2017

बस तेरी कमी के साथ..

पूरा आसमा मिला,मगर गीली ज़मीन के साथ
ये खेल खेलना था खुदा ने हम ही के साथ
कहने को देने वाले ने कोई कसर नही छोड़ी
सब कुछ दिया बस ....तेरी कमी के साथ

इस ज़मीं पर मुझसा दूसरा खुदा ने बनाया न होगा
मुझ जैसी तकदीर का हिस्सा किसी पर आजमाया नही होगा
अपने आप को किसी शहजादे से कम नहीं आंकता हूँ मैं
होंठो पर हंसी रखता हूँ,आँखों में नमी के साथ

 तेरी भी मुझसे ज्यादा किसी से बनती नहीं होगी
जोड़ी सिवा मेरे किसी से जचती भी नहीं होगी
तूँ आज भी मुझसे ज्यादा किसी को नही चाहती
जिंदगी गुजरेगी अब इसी गलत फहमी के के साथ

 कभी तो फोन कर खबर जान "गुरू"की
तुमने खत्म की मोहब्बत जो मैंने शुरू की
तेरी मज़बूरियों पर तो सो बार पर्दा किया था मैंने
मेरा ही दामन जला डाला तूने बड़ी बेरहमी के साथ